वरिष्ठ पत्रकार का बयान, 'चुनाव आयोग का काम EVM की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है,नाकि राजनैतिक पार्टियों को हार की समीक्षा करने का सलाह देना'


आखिरी रविवार को भारतीय चुनाव आयोग के बयान से सभी हैरान हो गए जब उन्होंने आम आदमी पार्टी को जारी किये गए पत्र में सुझाव दिया कि वो EVM की विश्वसनीयता पर सवाल करने के बजाय अपने हार के कारणों की समीक्षा करे|



इसके अलावा चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी उच्च न्यायलय में चुनाव अर्जी डालने को स्वतंत्र है अगर वो पंजाब में डाले गए वोट की जांच पेपर ट्रेल से करना चाहते हैं|

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हालांकि चुनाव योग का यह असंयमित बयान सोशल मीडिया पर मौजूद कई निष्पक्ष पत्रकारों को हजम नहीं हुआ| उनको हैरानी इस बात की हुई कि चुनाव आयोग का यह बयान निष्पक्ष ना होकर बीजेपी का निकला|



ज्ञात हो पंजाब चुनाव में आम आदमी पार्टी 20 सीट जीतकरसबसे बड़ी विपक्ष बनी| हालांकि यह प्रदर्शन उनके 117 सीटें जीतने के दावों के अनुरूप नहीं रहा|


EVM छेड़खानी पर बहस तब शुरू हो गई जब मध्य-प्रदेश के भिंड जिले से EVM के ख़राब होने की खबर आई| सिर्फ बीजेपी पर वोट पड़ने वाली मशीन का यह विडियो काफी वायरल हो गया| इस मामले को तूल पकड़ता देख चुनाव आयोग ने जांच शुरू कर दी और साथ ही दोनों जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को बर्खास्त करने का आदेश दिया|




इसके अलावा एक पत्रकार ने दोनों इलेक्शन कमीशनर अचल कुमार ज्योति और ओम प्रकाश रावत के विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किये| उनके द्वारा किये गए ट्वीट के अनुसार क तरफ ज्योति पूर्व गुजरात सरकार में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी अधिकारी रह चुके हैं और दूसरी तरफ ओम प्रकाश बीजेपी शासित मध्य-प्रदेश सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी रह चुके हैं|













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