क्या वाकई में हमलोग अपने देश में आजाद है?

समूचे देश में आजादी का जश्न मनाया जा रहा है| और मनाए भी क्यों नहीं, इस आजादी को पाने के लिए कई वर्षों तक हमारे लाखों-करोड़ों क्रांतिकारियों ने घर-परिवार समेत सबकुछ ताक पर रखकर संघर्ष किया| इनमें से कई क्रांतिकारी इस लड़ाई को लड़ते हुए शहीद भी हो गए|

कन्हैया कुमार,रविश कुमार और गुरमेहर कौर



लेकिन देश में जो कुछ चल रहा है,उसे देखकर मन में आजादी को लेकर कुछ सवाल उठते हैं| सोचता हूं कि क्या वाकई में हमें आजादी मिली है ??? क्या इसे आजादी कहते हैं जिसमें गरीबी,बेरोजगारी और मंहगाई चरम पर हो, जिसमें हमें सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का हक नहीं हो, जिसमें सिर्फ चंद उद्योगपतियों-नेताओं का राज हो,जिसमें हम क्या खाएं और क्या पहनें ये सत्ताधारी पार्टी बताएं,जिसमें हमारी सारी गोपनीय जानकारी तक सत्ताधारी पार्टी के पास हो,जिसमें मीडिया सरकार से सवाल करने के बजाय सिर्फ विपक्ष को निशाना बनाये, जिसमें आम आदमी खून-पसीने खर्चकर हांसिल की गई आमदनी का 28% पैसा सिर्फ टैक्स देने में खर्च करे और उद्योगपतियों का अरबों का टैक्स मांफ हो,जिसमें देश के अन्नदाता किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो??? अगर इसे आजादी कहते हैं तो क्या इसी आजादी के लिए उन लाखों क्रांतिकारियों ने अपने प्राण न्योछावर किये? 

इस लेख के जरिये कुछ इन्हीं सब महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करना चाहता हूं| यह सभी मुद्दे अपने आप में विशाल समुद्र की तरह हैं, अगर हर मुद्दों की गहराई में जाने की कोशिश करेंगे तो एक मुद्दे पर भी बहस खत्म नहीं हो पाएगी| इसलिए कोशिश करूंगा कि जितना संभव हो सकेगा उतने संक्षेप में इन सवालों को छूने की कोशिश करते हैं| 

अपना पक्ष रखने की आजादी 
सबसे पहला सवाल मन में उठता है बोलने की आजादी को लेकर| हाल के ही दिनों में हुई कुछ घटनाओं को लेकर मन संशय बना हुआ है कि क्या सच में हमारे देश में बोलने की आजादी है? 

कारगिल के शहीद जवान की 20 साल की बेटी गुरमेहर कौर जब भारत और पाकिस्तान के बीच शांति को लेकर एक विडियो जारी करती है और जब दिल्ली युनिवेर्सिटी में ABVP के कुछ गुण्डों द्वारा तोड़फोड़ और मारपीट के विरोध में आवाज उठाती है, तो उस लड़की का सत्ताधारी पार्टी के लोगों द्वारा चरित्रहनन किया जाता है| कॉलेज स्तर जैसे छोटे मामले पर बीजेपी के शीर्ष नेता उस छात्रा के खिलाफ बयान देने लग जाते हैं| सोशल मीडिया ट्रोल की सेना उसपर लगा दी जाती है| उसे बलात्कार जैसी धमकी मिलने लग जाती है| उसको बदनाम करने के लिए इन्टरनेट पर एक फर्जी विडियो चलाया जाता है जिसमें वह चलती गाड़ी में शराब पीकर नाचते हुए दिखती है|

शहीद की बेटी गुरमेहर कौर :HindustanTimes

जेएनयु में पीएचडी कर रहा एक लड़का कन्हैया कुमार जब सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसको और उसके विचारधारा का समर्थन करने वालों को डराने के लिए तमाम तरह की साजिशें रची जाती है| उसके किसी भाषण के विडियो में किसी अन्य विडियो की आवाज जोड़कर उसे देशद्रोही साबित करने की कोशिश की जाती है|
कन्हैया कुमार: Wikpedia

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पढाई कर रहे के गरीब दलित छात्र रोहित वेर्मुला का स्कालरशिप बंद कर दिया जाता है वो भी सिर्फ इस वजह से क्यूंकि वह ABVP के खिलाफ चलाए जा रहे किसी संस्था के आन्दोलन में भाग लेता है| अपनी स्कालरशिप पाने के लिए खूब संघर्ष करता है लेकिन अंत में उसे आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ता है|         
रोहित वेमुला :IndiaResists

जब एक न्यूज़ चैनल और उसके एंकर देश के महत्वपूर्ण मुद्दे जैसे महंगाई,गरीबी,बेरोजगारी,किसानों की आत्महत्या,भ्रष्टाचार आदि पर सरकार से सवाल करता है तो उसे डराने के लिए उसके खिलाफ बांकी चैनल,अख़बार और सोशल मीडिया पर बदनाम करने की मुहीम चलाई जाती है, उसके चैनल पर एक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी जाती है| फिर इससे भी ना डरे तो उसपर सीबीआई और इनकम -टैक्स की छापेमारी की जाती है|
एनडीटीवी पत्रकार रविश कुमार

शिक्षा और स्वास्थ्य 
किसी भी देश के विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है| सभी वर्ग,जाति-समुदाय के लोगों का हक है शिक्षा और स्वास्थ्य| लेकिन दुर्भाग्यवश हमारे देश में इसकी भी हालत जर्जर है| सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पतालों की कितनी दयनीय हालत है इससे सभी परिचित हैं| नेताओं और उनके  लिए उद्योगपतियों के लिए यह दोनों क्षेत्र लोगों की मुलभूत सुविधा छोड़कर एक बड़ा कारोबार बन चूका है| सरकारी अस्पतालों और विद्यालयों की स्थिति को जानबूझकर खराब स्थिति में रखा जा रहा है ताकि लोग इलाज सरकारी अस्पताल छोड़कर इन नेताओं और उद्योगपतियों के अस्पताल में कराएं और लोग अपने बच्चों को इनके स्कूल में पढ़ा सकें|   

इसका नतीजा यह हुआ है कि दुनिया में सबसे जयादा अनपढ़ आबादी हमारे देश में है| 
सरकारी अस्पतालों की क्या हालत है गोरखपुर में हुआ हादसा एक ताजा उदाहरण है जहां अस्पताल में ऑक्सीजन की सिलिंडर की कमी होने की वजह से 60 नवजातों की मौत हो जाती है| स्वास्थ्य के क्षेत्र में हालत यह है कि लोगों को सरकारी अस्पताल छोड़ निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है| जबकि निजी अस्पताल में इलाज खर्च कई गुना ज्यादा है| इसका कारण साफ़ है कि लोगों को सरकारी अस्पतालों के इलाज पर भरोसा नहीं है|

71वी नेशनल सैंपल सर्वे(एनएसएस) 2016 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में 42% लोग सरकारी अस्पताल में जाते हैं और 58% निजी अस्पताल में| जबकि शहरी क्षेत्र में 32% लोग सरकारी अस्पताल में और 68% निजी अस्पताल में जाते हैं| 

देश में किसानों की बदहाली
Photo- IndiaToday

किसान को देश का अन्नदाता कहा जाता है| लेकिन इन अन्नदाताओं की हालात काफी खास्ताहाल है देश में| कहने के लिए तो हमारा देश किसान प्रधान देश है लेकिन यहां किसान मरने के लिए है और बांकी सब लूटकर खाने के लिए| हालत यह है कि किसानों को अपने फसल का मुनाफा मिलना तो दूर की बात है लागत तक नसीब नहीं होती उन्हें| इस वजह से कई किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं| एक आंकड़े के अनुसार पिछले 20 वर्षों में साढ़े तीन से चार लाख आत्महत्या कर चुके है| 
यहां अम्बानी-अदानी जैसे उद्योगपतियों के लाखों-करोड़ कर्ज मांफ कर दिए जाते हैं लेकिन किसान के चंद हजार रूपये के कर्ज माफ़ नहीं करते|  

खून पसीने से कमाए गए अपने पैसे पर हमारा पूरा अधिकार नहीं
आम आदमी अपना पसीना बहाकर कुछ आमदनी इकट्ठा करता है| लेकिन इस पैसे पर भी उसका कोई अधिकार नहीं| सरकार उद्योगपतियों का कर्ज मांफ करने के लिए रातो-रत नोटबंदी ले आती है| और आम आदमी को मजबूर कर दिया जाता है अपना पैसा बैंक में जमा करने के लिए और जब वो जमा कर देता है पैसे फिर उसे अपने पैसे बैंक से निकालने के लिए खूब भागदौर करनी पड़ती है| पैसे निकालने की सीमा तय कर दी जाती है और उसे कैशलेस transaction करने को मजबूर किया जाता है| जब वह कैशलेस लेन-देन करता है तो इस लेन-देन के लिए भी बैंक को चार्जेज देना पड़ता है|


लोकतंत्र 
सबसे जो मुख्य सवाल मन में उठता है वह है लोकतंत्र और इसके मूल सिधांत को लेकर| हम जो आजकल के माहौल देख रहे हैं,क्या वह भी लोकतंत्र की श्रेणी में आता है?

लोकतंत्र की जो परिभाषा है: “जनता के द्वारा ,जनता के लिए और जनता का शासन|” 

क्या हमारे देश में इसका पालन किया जा रहा है ??

यह देखा जा रहा है जो भी सरकार की किसी भी नीति या फैसले से असहमत होता है उसे देशद्रोही करार दे दिया जाता है| जब किसान,व्यापारी,छात्र आदि किसी का भी संगठन अपनी मांग को लेकर धरना प्रदर्शन करता है उसपर लाठीचार्ज करवा दिया जाता है|

लोकतंत्र में विपक्ष का एक महत्वपूर्ण योगदान होता है| लेकिन आजकल विपक्ष के अस्तित्व को ही खत्म करने की कोशिश की जा रही है| हमारे संसद में किसी भी कानून को पास करने के लिए लोकसभा और राज्यसभा है| लेकिन सरकार द्वारा फाइनेंस बिल के जरिये बिना राज्यसभा में चर्चा किये कोई भी कानून पास कर दिया जाता है| जबकि फाइनेंस बिल आपातकाल स्थिति में लाया जाता है| वर्तमान सरकार द्वारा इस फाइनेंस बिल के जरिये 40 नए कानून पास कर दिये गए और लोगों को खबर तक नहीं मिली| इस 40 कानून में से कुछ कानून तो ऐसे हैं जिसके बारे में जानकर हिटलर जैसे तानशाह की याद आती है| वो कौन से कानून लाए गए हैं वो आप यहां जान सकते हैं|
Link- Breaking Down the Finance Bill’s All-Encompassing Amendments   


आधार- कार्ड
आधार कार्ड अनिवार्य करना लोगों के निजता के साथ खिलवाड़ है। सरकार के नए फैसले जिसमें सभी छोटी बड़ी कार्यो के लिए आधार कार्ड लिंक करना अनिवार्य हो गया है। जैसे अब आपको अपने मोबाईल नम्बर को आधार कार्ड से लिंक करना होगा। जन्म प्रमाणपत्र और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए भी आधार कार्ड होना अनिवार्य है, अगर आपके पास आधार कार्ड नही है तो फिर ये प्रमाणपत्र आपको नही मिलेगी। आपका का खाता बैंक से जुड़ा  रहेगा|

एक रिपोर्ट के अनुसार हाल में ही 1 करोड़ से ज़्यादा लोगों की इन्फॉर्मेशन चोरी हो गयी है। महेंद्र सिंह धोनी जैसे बड़े सेलेब्रिटी की भी प्राइवेट इन्फॉर्मेशन चोरी कर सार्वजनिक कर दी गयी। तो आप सोच सकते हैं कि आम आदमी का डेटा कितना सुरक्षित रहेगा|

आधार कार्ड को लिंक करने से आपकी सारी प्राइवेसी खत्म हो रही है।क्योंकि हमारी सारी इंफॉर्मेशन सरकार के पास है| अगर यह चोरी हो गयी फिर आपके निजी जानकारी का दुरूपयोग किया जा सकता है।

चिंताजनक बात ये है कि आधार कार्ड बनवाने की जिम्मेदारी किसी निजी कंपनी को दिया जा रहा है| ऐसे में जो हम आधार बनवाते वक्त अपने रेटिना और अंगूठे का प्रिंट देते हैं  यह सारी उन कंपनियों के पास होगी|   और यह सारा डेटा ऑनलाइन है जिससे कोई भी छेड़छाड़ कर सकता है।

आज़ादी के बाद भी हमारी निजता में दखल दिया जा सकता है और वो निज़ी होकर भी सार्वजनिक हो जाएगी।
   
मीडिया
मीडिया को समाज का आयना और लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है| लेकिन अब इस स्तम्भ में घुन लग चूका है| यह समाज के मुद्दों को छोड़ सत्ताधारी पार्टी की गुलामी करने में लग गई है| अब यह मीडिया मोदी जी द्वारा केदारनाथ में 4 घंटे तक की गई आरती को कवर करती है| मोदी जी ने जापान में ढोल बजाया,अमेरिका में भाषण दिया,अहमदाबाद में चीन के राष्ट्रपति के साथ झूला झूला आदि दिखाने में व्यस्त रहती है| कुछ पत्रकार तो मोदी जी के साथ सेल्फी लेने में व्यस्त रहते हैं|
बीजेपी मुख्यालय में पत्रकार मोदी जी के साथ सेल्फी लेते हुए Photo:बिजनेस स्टैण्डर्ड

और इन सभी पत्रकरों को हम टीवी चैनल में सिर्फ केंद्र सरकार की विचारधारा पर बोलते हुए सुनते हैं| चीन,पाकिस्तान,हिन्दू-मुसलमान,वन्दे-मातरम,भारत माता की जय और देशभक्ति का चादर ओढ़कर देश के महत्वपूर्ण मुद्दे जैसे भ्रष्टाचार,बेरोजगारी,महंगाई,किसानों की आत्महत्या आदि को दबा दिया जाता है| और जब कोई पत्रकार इन सभी मुद्दों पर आवाज उठाता है तो उसे हर तरीके से डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है| उसके फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया अकाउंट पर गालीबाजों की फौज लगा दी जाती है और उसके परिवार को झूठे केस में फंसा दिया जाता है| 


इन सभी मुद्दों पर गौर करने के बाद मन विचलित हो उठता है और सोचता हूं कि क्या सच में इसे ही आजादी कहते हैं?? क्या इसी तरह की आजादी के लिए भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु आदि ने अपने प्राण त्यागे थे???? 

Powered by Blogger.