दिल्ली शिक्षा क्रांति: कई बच्चों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में लिया दाखिला



आपने यह तो सुना होगा कि लोग सरकारी स्कूल से अपने बच्चों का नाम कटवाकर किसी अच्छे महंगे प्राइवेट स्कूल में दाखिला करवाते है लेकिन यह शायद पहले कभी नही सुना होगा कि माता-पिता अब प्राइवेट स्कूल  से नाम कटवाकर सरकारी स्कूल में दाखिला करवाते हो।

लेकिन दिल्ली में ऐसा हो रहा है। जी हां सही सुना आपने। इस साल 900 से ज़्यादा बच्चों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में नाम लिखवाया है,जो सच में एक चौंकाने वाली खबर है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 900 से ज़्यादा बच्चों ने प्राइवेट स्कूल  सरकारी स्कूल में दाख़िला लिया है।

सरकारी स्कूल में शिक्षा का स्तर सुधरा

जब से दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार बनी है तब से उनकी सरकार ने शिक्षा पर सबसे ज़्यादा जोर दिया है। कुल बज़ट के 25% सिर्फ शिक्षा पर ख़र्च किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया का दावा है कि उनकी सरकार बनने के बाद शिक्षा क्षेत्र में क्रांति आई है।

54 मॉडल स्कूल ने बदला लोगों का नजरिया
दिल्ली सरकार ने बीते 2 सालों में 8 हजार नए क्लासरूम बनवाए जोकि कहा जाता है 200 के स्कूल के बराबर है। लेकिन सबसे ज़्यादा आकर्षण का केंद्र बने दिल्ली के नए मॉडल स्कूल । सभी मॉडल स्कूल में अच्छे क्लासरूम , प्रोजेक्टर, सीसीटीवी कैमरा, कंप्यूटर लैब्स, मैथ्स लैब, केमिस्ट्री लैब, लिफ्ट, स्विमिंग पूल के साथ खेलन कूदने की भी अच्छी व्यवस्था है।

खेल पर भी विशेष ध्यान











दिल्ली सरकार ने बच्चों के खेलकूद पर भी अच्छा ध्यान दिया है। सरकारी स्कूलों में तरह-तरह के खेल की व्यवस्था की गई है। खेल को बढ़ावा देने के लिए इन स्कूलों में तरह-तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। सरकार द्वारा दिल्ली देहात में एक इंटरनेशनल लेवल की हॉकी ग्राउंड आम लोगों के लिए भी खोला है। जिसमें स्कूली छात्र भी खेल सकते है। 

इसके अलावा दिल्ली सरकार 10वीं और 12वीं बोर्ड में स्पोर्ट्स का भी नंबर कुछ फीसदी बढ़ाने पर विचार कर रही है।

शिक्षा मंत्री का औचक निरक्षण















दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया रोजाना किसी न किसी स्कूल में औचक निरक्षण करते हैं जिससे स्कूलों में क्या खामियां है उसका पता चल पाता है। मिड डे मील का स्तर भी काफ़ी सुधरा है जबकि पहले इसकी काफ़ी शिकायते आती थी।

शिक्षकों का सिर्फ पढ़ाने पर ही ध्यान देना
दिल्ली सरकार ने शिक्षकों पर दिये गए अतिरिक्त बोझ को कम कर दिया है। उन्हें सिर्फ पढ़ाने पर ध्यान देने के लिए कहा गया। पहले शिक्षकों को इलेक्शन ड्यूटी, जनगनना जैसे कामों पर भेजा जाता था लेकिन दिल्ली सरकार ने अब वो नीति खत्म कर दी है।
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