1.6 करोड़ लोग बेरोजगार हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली के डेढ़ साल के शासनकाल में

Unemployment in one and half year tenure of Arun Jaitley as a Finance Minister
Photo Credit: NDTV



सरकार ने नोटबन्दी की जो ब्रांडिंग की वो किसी से कुछ छुपा नही है। मोदी सरकार ने सभी जगह अपनी पीठ थपथपाई है नोटबन्दी के मसले पर। लेकिन एक खुला खत आया है जिसमे कहा गया है कि नोटबन्दी की वजह से 15 लाख लोगों को काम से निकाल दिया गया। मतलब साफ़ है अर्थव्यवस्था पर नोटबन्दी का काफ़ी बुरा असर पड़ा है। अपने खुले पत्र में कांग्रेस ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से पूछा है कि खुद सरकार द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने पर क्या उनको दुख नही हुआ?
CMIE के ताजा सर्वे के मुताबिक 15 लाख जॉब सिर्फ और सिर्फ नोटबन्दी के कारण गई है । लेबर ब्यूरो डाटा के मुताबिक जबसे अरूण जेटली वित्त मंत्री बने हैं तबसे करीब 1.6 करोड़ लोग बेरोजगार हुए । विपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि 15 लाख नौकरियाँ सिर्फ नोटबन्दी की वजह से गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेटली द्वारा आम लोगों पर वित्तीय अघोषित आपातकाल और गरीबों पर सीधा सर्जिकल स्ट्राइक किया गया है।

सर्वे पर रोक लगा दी
खुले पत्र में दावा किया गया है जब से मोदी सरकार आई है और अरुण जेटली वित्त मंत्री बने है तब से रोजगार मामले पर सर्वे करना बंद कर दिया गया है। पत्र में पूछा है की क्यूँ सरकार के पास इस बात का कोई भी आंकड़ा नही है कि कितने लोगों को रोजगार मिली। "नीति आयोग" क्यो नही गरीबी पर सर्वे करती है। अब कितने लोग  गरीब हैं देश मे इसका केंद्र सरकार द्वारा कोई भी आधिकारिक आंकड़ा क्यों नही जारी किया जाता।

पत्र में पूछा कि लोग शायद अपनी नौकरियां इसलिए खो रहे हैं क्योंकि सरकार ने अचानक से देश के ऊपर पहले नोटबन्दी फिर GST थोप दिया वो भी तब जब मैन्युफैक्चरिंग अपने 9 साल के सबसे निम्नतम स्तर पर है। लगातार बढ़ते ब्याज दर की वजह से लोग निवेश नहीं कर पा रहे है। शायद जॉब इसलिए जा रही है कि नॉन एग्रीकल्चर सेक्टर में कोई काम ही नही हो रहा।
पत्र में खेती के विभाग पर चर्चा की है| इस पत्र के अनुसार शायद  खेती के क्षेत्र में शायद नौकरियाँ प्राकृतिक आपदा की वजह से जा रही है,चूँकि पिछले देश लगातर दूसरे साल सुखाड़ से ग्रस्त है| और सरकार पर किसानों से आउट ऑफ़ टच का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा सिर्फ अपने करीबी उद्योगपतियों का कर्ज NPA(non-performing assets) का हथियार इस्तेमाल कर किया जा रहा है| जबकि कर्ज की वजह से आत्महत्या कर रहे किसानों के कर्ज मांफ नहीं कर रही है सरकार|

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